शरद पवार के घर मोदी के विरोधियों की मीटिंग की क्यों है इतनी चर्चा?

शरद पवार के घर मोदी के विरोधियों की मीटिंग की क्यों है इतनी चर्चा?

पूर्व केंद्रीय मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा के मुताबिक राष्ट्र मंच की मंगलवार को होने वाली मीटिंग को लेकर लगाए जा रहे क़यासों को लेकर वो ‘गुस्से में हैं सिन्हा तीन साल पहले यानी साल 2018 में गठित ‘राष्ट्र मंच’ के समन्वयक है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार के घर मंगलवार को होने वाली जिस मीटिंग को लेकर तमाम राजनीतिक अनुमान लगाए जा रहे हैं, वो राष्ट्र मंच के बैनर तले ही हो रही है.

ट्विटर पर इस मीटिंग की जानकारी देने वाले सिन्हा ने बीबीसी से कहा, “पहले राष्ट्रमंच की मीटिंग होती थी तो कोई नोटिस नहीं लेता था. ”

वो कहते हैं, “ये एक साधारण सी बैठक है, बस फर्क ये है कि शरद पवार के घर पर हो रही है. तो मीडिया ने इतना चढ़ा बढ़ा के इसको पेश करने का प्रयास किया है.”

उन्होंने कहा, “मीडिया के मुताबिक कल (मंगलवार को) देश में क्रांति हो जाएगी. इस पर आगे हम कुछ बोलना नहीं चाहते हैं मीडिया को जो अटकल लगाना है लगाने दीजिए.”

पवार- प्रशांत की मुलाक़ात

मीटिंग को लेकर इतना तूल इसीलिए दिया जा रहा है क्योंकि ये शरद पवार के घर हो रही है और ये तर्क बेवजह नहीं है.

शरद पवार की तमाम मीटिंग लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं और मंगलवार की मीटिंग ऐसे वक़्त में हो रही है जब महाराष्ट्र सरकार के भविष्य को लेकर कई सवाल पूछे जा रहे हैं.

पवार के घर मंगलवार को होने वाली मीटिंग की आधिकारिक ख़बर एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने ट्विटर पर दी.

लेकिन उसके पहले से ही मीटिंग को लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म था. पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का चुनाव प्रबंधन करने वाले रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सोमवार को ही शरद पवार से मुलाक़ात की थी. मीडिया की दिलचस्पी इस मुलाक़ात में भी थी. पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद प्रशांत किशोर की ये शरद पवार से दूसरी मुलाक़ात थी.

इस मुलाक़ात के बाद आधिकारिक तौर ऐसी जानकारियां सामने नहीं आईं जिनके ज़्यादा राजनीतिक मायने हों लेकिन पवार और प्रशांत किशोर की दोनों मुलाक़ातों को लेकर अटकलें खूब लगाई गईं. इसे विपक्ष ख़ासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधियों को गोलबंद करने की कोशिश से भी जोड़कर देखा गया.

पवार के हर दल में दोस्त

दरअसल, प्रशांत किशोर कई राज्यों में नरेंद्र मोदी और बीजेपी को चुनौती देने वाले नेताओं को चुनावी रणनीति बनाने में मदद कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल में वो ममता बनर्जी के सलाहकार रहे तो दिल्ली में वो अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के साथ थे. दक्षिण भारत में वो डीएमके के सहयोगी रहे तो पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ जुड़े हुए हैं.

वहीं, महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार गठन के बाद से शरद पवार को एक ऐसे नेता के तौर पर देखा और बताया जा रहा है जो राष्ट्रीय स्तर पर मोदी और बीजेपी का विकल्प तैयार कर सकते हैं. शरद पवार के सभी दलों से अच्छे रिश्ते बताए जाते हैं. यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी में भी उनके कई दोस्त हैं.

विपक्ष को करेंगे एकजुट?

पवार से कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने भी मुलाक़ात की थी, उसे लेकर भी खूब चर्चा हुई थी. फडनवीस ने तमाम अटकलों को ख़ारिज करते हुए इसे एक शिष्टाचार मुलाक़ात बताया था. पवार के दिल्ली स्थित घर पर मंगलवार को होने वाली बैठक को लेकर दूसरे नेता भले ही ज़्यादा जानकारी देने से बच रहे हों लेकिन नवाब मलिक ने एजेंडे की जानकारी दी है. उन्होंने ट्विटर पर बताया, “मीटिंग में देश के मौजूदा हालात पर चर्चा की जाएगी.” मलिक ने ये भी कहा, “शरद पवार देश के विपक्षी दलों को एकजुट करने का काम करेंगे.”

मोदी को चुनौती

नवाब मलिक के मुताबिक इस मीटिंग में यशवंत सिन्हा के अलावा आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह, सीपीआई नेता डी राजा, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फ़ारूक़ अब्दुल्लाह और समाजवादी पार्टी नेता घनश्याम तिवारी हिस्सा लेंगे. इस बैठक में लेखक, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों को भी बुलाया गया है.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रीय जनता दल समेत कई और विपक्षी दलों के नेता भी इस मीटिंग में हिस्सा ले सकते हैं. इसलिए इसे अहम माना जा रहा है.

हालांकि, महाराष्ट्र की सरकार में एनसीपी की सहयोगी कांग्रेस और शिवसेना से मीटिंग में किसी नेता के शामिल होने पर अभी कोई साफ़ जानकारी नहीं है.

अभी अगले लोकसभा चुनाव में तीन साल का वक़्त बाकी है लेकिन अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में चुनाव होने हैं और इन्हें भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है.

भारतीय जनता पार्टी को बीते कुछ सालों से पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दिल्ली जैसे राज्यों में मजबूत चुनौती का सामना करना पड़ा है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के मुक़ाबले विपक्ष ज़्यादा मज़बूत नहीं दिखता.

कांग्रेस के सीनियर नेता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को कहा था, “मज़बूत राजनीतिक विकल्प के नाम पर अभी एक खाली जगह है. ”

कांग्रेस के कई दूसरे नेता और दूसरे विपक्षी दल भी ऐसा बयान देते रहे हैं. कांग्रेस और ममता बनर्जी बीते सालों में बीजेपी के ख़िलाफ़ विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश करते रहे हैं. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने गठजोड़ कर ऐसा विकल्प बनाने की कोशिश की थी लेकिन ये प्रयास कामयाब नहीं हुए.

विपक्ष के कई दलों को अब ऐसी उम्मीद शरद पवार में दिखती है और मंगलवार की मीटिंग को लेकर एनसीपी में जिस तरह का उत्साह दिख रहा है, उससे लगता है कि पवार भी ऐसी उम्मीदों को हवा देना चाहते हैं.

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