विद्या निकेतन उप्रावि मधुकर परिसर सागवाड़ा में अखंड भारत दिवस मनाया गया, 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं का किया निर्माण।

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सागवाड़ा। विद्या निकेतन उच्च प्राथमिक विद्यालय मधुकर परिसर सागवाड़ा में आज अखंड भारत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता हरिश्चंद्र सोमपुरा रहे। इस अवसर पर अतिथि परिचय एवं स्वागत स्थानीय विद्यालय के संस्था प्रधान जितेंद्र जोशी ने किया।

इस अवसर पर हरीश सोमपुरा ने बताया कि 14 अगस्त 1947 को महर्षि अरविंद ने कहा था की नियति ने इस भारत भूखंड को एक राष्ट्र के रूप में बनाया है और यह विभाजन अस्थाई है प्रतिवर्ष 14 अगस्त को अखंड भारत दिवस मनाया जाता है और देश को पुनःअखंड संपूर्ण बनाने का संकल्प को लेकर करोड़ों स्वयंसेवकों द्वारा देश भर में मनाया जाता है।  1857 से  1947 तक हिंदुस्तान के कई टुकड़े हुए और इस तरह बन गए सात नए देश 1947 में बना पाकिस्तान भारतवर्ष का पिछले 25 सौ सालों में एक तरह से 24 वा विभाजन था। 1857 में भारत का क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग किलोमीटर था और वर्तमान भारत का क्षेत्रफल 33 लाख वर्ग किलोमीटर है। पड़ोसी 9 देशों का क्षेत्रफल 50 लाख वर्ग किलोमीटर बनता है।

विद्यालय में 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं  का निर्माण।

वही विद्यालय में शिशु वाटिका प्रमुख एवं सहप्रान्त प्रमुख शीला जोशी ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुसार पहले से ही 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं  का निर्माण किया गया है। यह 12 शैक्षिक  व्यवस्थाए बालक के सर्वांगीण विकास एवं व्यवसायिक शिक्षा को  प्रभावी करने के लिए उपयोगी है 12 शैक्षिक  व्यवस्थाएं जिसमे विज्ञान प्रयोगशाला, वस्तु संग्रहालय, चिड़ियाघर, तरणताल, आदर्श  घर, बगीचा, कार्यशाला, कलाशाला, रंगमंच, चित्र पुस्तकालय, क्रीडांगण, प्रदर्शनी कक्ष है।

इस तरह की सभी व्यवस्थाएं इस परिसर के अंदर ही आयोजित की गई है इसी के साथ गतिविधि आधारित शिक्षा एवं बस्ता विहीन शिक्षा की व्यवस्था की गई है। इन शैक्षिक व्यवस्थाओं के आधार पर बालक का शारीरिक  मानसिक विकास इंद्रिय विकास को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है साथ ही विद्यालय में पांच आधारभूत विषय का भी शिक्षण करवाया जाता है जिसमें  योग शिक्षा, शारीरिक शिक्षा, संगीत शिक्षा, नैतिक आध्यात्मिक शिक्षा  एवं संस्कृत शिक्षा का भी अध्ययन करवाया जाता है। विद्या भारती संस्थान की योजना अनुसार सागवाडा नगर का एकमात्र विद्यालय जो नयी शिक्षा नीति को आधार मानकर क्रियाआधारित एवं गतिविधि आधारित शिक्षण कार्य योजना में ला रहा है।

इसी के साथ बालक के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पुष्प नक्षत्र में प्रति माह सुवर्णप्राशन संस्कार कार्यक्रम का आयोजन करता है। इससे बालक को विविध प्रकार के बैक्टीरिया एवं वायरस के इन्फेक्शन से बचाता है सुवर्ण प्राशन यह एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक टीकाकरण पद्यति है भारत के आयुवेध ग्रन्थ में इसका उल्लेख हजारों साल से है सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक तत्वों की पूर्ति करने में अहम् भूमिका निभाता  हैं इसके सेवन से बालक में इम्यूनिटी पावर बढता है।

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